अगर आप सोच रहे हैं कि हम पर्यावरण को बचाने के लिए कुछ नहीं कर सकते, तो आप गलत हैं । Environment को बचाने की शुरुआत तो घर से ही की जाती है । रसोई हमारे घर का वह हिस्सा है, जहां से सबसे ज्यादा कचरा निकलता है । आज जहां सब लोग अपने जीवन शैली को zero waste lifestyle में बदल रहे हैं तो क्यों ना हम भी अपनी रसोई को zero Waste kitchen में बदलें । हमारी किचन से निकलने वाला single use plastic और रोजाना का कचरा हमारे Environmental impact ( पर्यावरण पर असर ) को बढ़ा रहा है । लेकिन mindful living और sustainability at home के जरिए हम इसे बदल सकते हैं । आज हम बात करेंगे कुछ ऐसे small changes की जो आपकी रसोई को एक Eco friendly space बनाएंगे । साथ ही आपके carbon footprint को कम करने में मदद करेंगे । आईए जानते हैं जीरो वेस्ट किचन टिप्स जो हर किसी के लिए आसान और असरदार है –

प्लास्टिक को कहे अलविदा –
अब ये तो हम सब जानते हैं कि प्लास्टिक पर्यावरण के साथ-साथ हमारे व अन्य जीवों के लिए भी खतरनाक होता है । प्लास्टिक से पर्यावरण प्रदूषण होता है । इससे पशुओं को भी हानि होती है । यह मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा है । इससे श्वसन तंत्र, तंत्रिका तंत्र, लिवर, किडनी को नुकसान पहुंचता है । साथ ही ये कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को जन्म देता है । जब यह इतना खतरनाक है तो इसे अपने घर के किचन में जगह क्यों देना है ? तो लिए आज अपने किचन को plastic free बनाते हैं –
- अगर रसोई में प्लास्टिक के जार या कंटेनर है तो उसे कांच, सिरेमिक या स्टेनलेस स्टील से बदलें । शहद या जैम के खाली कांच के कंटेनर धोकर प्रयोग किये जा सकते हैं ।
- वसायुक्त या तेलिय खाद्य पदार्थ को कभी भी प्लास्टिक के जार में ना रखें ।
- अगर माइक्रोवेव ओवन का प्रयोग कर रहे हो तो प्लास्टिक के डिब्बो में खाद्य पदार्थ कभी भी गरम ना करें । भले ही उसे पर ‘माइक्रोवेव सुरक्षित’ लिखा हो ।
- पीवीसी से बने प्लास्टिक रैप में खाद्य पदार्थ स्टोर ना करें । इसके स्थान पर एल्युमिनियम फॉयल या बीज़वैक्स रैप सुरक्षित विकल्प है ।
- पके हुए और गरम भोजन को प्लास्टिक बॉक्स या प्लेट में ना रखें । इससे प्लास्टिक में उपस्थित खतरनाक रसायन भोजन में मिल सकते हैं ।
- बच्चों के टिफिन, पानी की बोतल, चम्मच, फ्रिज की बोतलें, व कंटेनर भी प्लास्टिक के ना हो ।
- सब्जी काटने के लिए प्लास्टिक की जगह लकड़ी का कटिंग बोर्ड प्रयोग करें ।
- फल व सब्जियां बांस की टोकरी में रख सकते हैं ।
- खाना पकाने के लिए स्टील व लोहे के बर्तन सबसे बेहतर होते हैं ।
गीला कचरा फेंके नहीं, यह सोना है ।
रसोई से निकलने वाला ज्यादातर कचरा गीला कचरा होता है। जिसमें फल व सब्जियों के छिलके, बचा हुआ भोजन शामिल है । फल व सब्जियों के छिलके अक्सर अलग करके हरे डस्टबिन में डाले जाते हैं । जिसे नगर पालिका वाली कचरे की गाड़ी ले जाती है । वहां उसे या तो लैंडफिल किया जाता है, या औद्योगिक कंपोस्टर में डाला जाता है । यह औद्योगिक कंपोस्टर हर शहर में उपलब्ध नहीं होते हैं । गीले कचरे को लैंडफिल करने से उसमें से खतरनाक गैसें निकलती है । इन गैसों से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है । लेकिन हम यहां जीरो वेस्ट किचन की बात कर रहे हैं, तो इसे भी हमें वेस्ट नहीं करना चाहिए । यह वेस्ट नहीं गोल्ड है । इससे घर पर ही फ्री में ऑर्गेनिक खाद ( कंपोस्ट ) बनाई जा सकती है । यह खाद आपके किचन गार्डन के लिए सोना है ।
कैसे बनाएं – खाद किसी गड्ढे या ड्रम या किसी कंटेनर में बनाई जा सकती है । ध्यान दें कि इसमें हवा के लिए छेद बने हो । इसे तेज धूप या बारिश में ना रखें । छाया में रखना ही सही रहता है । इसे किसी पतले कपड़े से ढका भी जा सकता है ।
खाद बनाने के लिए गीला कचरा इस कंटेनर में डालें । उस पर कार्बन युक्त सामग्री की एक परत छिड़कें । कोकोपीट, लकड़ी का बुरादा, अच्छी तरह से सूखे पत्ते या रीमिक्स पाउडर सभी कार्बन युक्त सामग्रियां है । ध्यान रहे बर्तन में ज्यादा नमी न हो । इसमें एक कप छाछ या गुड़ का पानी भी डाल सकते हैं । यह नुकसानदायक नहीं बल्कि फायदेमंद ही रहती है । इस बीच-बीच में हिलाते भी रहना चाहिए । एक-दो महीने में खाद तैयार हो जाएगी । इसमें वे सभी जरूरी पोषक तत्व होंगे जो पौधों को चाहिए ।

सस्टेनेबल शॉपिंग ( स्मार्ट खरीददारी ) –
अब बात जब सस्टेनेबल किचन की हो तो सस्टेनेबल शॉपिंग भी जरूरी है । सस्टेनेबल शॉपिंग यानी टिकाऊ खरीददारी। इसे निम्न बिंदुओं से समझ सकते हैं –
- किचन में बहुत सा ऐसा सामान होता है जो कई वर्षों तक चलता है । जैसे आटे या अनाज की बड़ी टंकी या कंटेनर, बांस की टोकरियां, बर्तन, मसाले, दाल, व ड्राई फ्रूट्स के कंटेनर आदि । यह प्लास्टिक के ना खरीदे ।
- स्थानीय, मौसमी और ताजे फल व सब्जियां खरीदें । इससे परिवहन और पैकेजिंग में होने वाली ऊर्जा की बचत होगी ।
- कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जो महीनों तक खराब नहीं होते । उन्हें ज्यादा मात्रा में खरीदें । कम से कम एक महीने का सामान तो जरूर खरीदें । इससे बार-बार खरीदने से होने वाला कचरा नहीं होगा ।
- दालें या चावल खुले खरीदें तो बेहतर रहता है ।
- अगर रसोई में पहले से समान है तो उसे ना खरीदना ही सही है । इससे पैसों की भी बचत होगी और सामान भी खराब नहीं होगा ।
- प्लास्टिक के डिब्बे वाले प्रोडक्ट खरीदने से बचें । उनके स्थान पर कोई अन्य विकल्प ढूंढें ।
- सफाई के लिए हानिकारक रसायनों के बजाय पर्यावरण के अनुकूल, बायोडिग्रेडेबल सफाई सामग्री चुने ।
- अगर किचन गार्डन है तो वहां सब्जियां उगाएं । यह ऑर्गेनिक होती है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छी होती है ।
- शॉपिंग के लिए जाने से पहले घर से कपड़े का थैला जरूर लेकर जाएं।
डिस्पोजेबल से रीयूजे़बल तक –
डिस्पोजेबल चीजें जितनी कम उपयोग में ले उतना अच्छा है । इससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा और पैसे भी बचेंगे । किचन की बात करें तो बहुत सी चीजों को रीयूज़ किया जा सकता है । आईए जानते हैं –
- चाय-कॉफी के कप डिस्पोजेबल ना हो । उनके स्थान पर मिट्टी, कांच या स्टील के कप उपयोग में लें ।
- पानी की बोतले भी स्टील या कांच की हो । प्लास्टिक की डिस्पोजेबल बोतलों से दूर रहें ।
- जैम, सॉस व शहद के कांच के कंटेनर या बोतलें फेंके नहीं । उन्हें धोकर कुछ भी सामान रखने के प्रयोग में लिया जा सकता है ।
- पेपर टॉवल की जगह कपड़े के टॉवल रखें ।
- खाद्य पदार्थ या फल-सब्जियों को प्लास्टिक की थैली में ना रखें । बांस की टोकरी या स्टील के कंटेनर में रखना सुरक्षित है ।
- सिट्रस के छिलकों का प्रयोग घरेलू प्राकृतिक क्लीनर बनाने में करें ।
- जो फल – सब्जियां बाहर जल्दी खराब हो जाती है, उन्हें फ्रिज में ठीक से स्टोर करें ।
- फल व सब्जियों के छिलकों, प्रयोग में ली हुई चायपत्ती -कॉफी से खाद बनाई जा सकती है ।

Smart food management ( खाने की बर्बादी रोकें ) –
क्या आप जानते हैं दुनिया के 783 मिलियन लोग भूख का सामना कर रहे हैं । ऐसे में खाने की बर्बादी करना शर्मनाक होता है । खाने को बर्बाद करना भी कचरा बढ़ाने में मदद करता है, जो पर्यावरण के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है । भोजन हमारी प्राथमिक आवश्यकताओं में से एक है । इसलिए इसे बचाना और सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है । यह कार्य भी money saving की तरह ही करना चाहिए । आईए जानते हैं कुछ रोचक तरीके, फूड मैनेजमेंट के –
- अगर फल-सब्जी बच जाए तो उसे फ्रिज में स्टोर करके रखा जा सकता है जो बाद में काम आए ।
- कोशिश करें कि फल व सब्जी के हर हिस्से का सही प्रयोग हो ।
- बची हुई ब्रेड को सूप या सलाद में प्रयोग किया जा सकता है । ब्रेडक्रंब्स में भी बदलकर रख सकते हैं ।
- अगर कोई खाद्य पदार्थ सुखाकर कई दिनों तक प्रयोग में लिया जा सकता है तो उसे सुखाकर स्टोर करें ।
- “पहले आओ पहले जाओ” वाली रणनीति अपना कर चीजों को व्यवस्थित करें । इससे पुरानी चीजें पहले इस्तेमाल में आ जाएगी और खराब नहीं होगी ।
- खाद्य पदार्थों को नमी से बचाए वरना वे खराब हो सकते हैं ।
- समय-समय पर खाद्य पदार्थों को धूप दिखाएं ।
- खाना उतना ही बनाएं जितना आवश्यक हो ।
- जरूर से ज्यादा खाद्य सामग्री ना खरीदें ।
क्या आपने दूध फट जाने पर उससे पनीर बनाया है । अगर हां तो यह भी फूड मैनेजमेंट ही है ।
निष्कर्ष –
सतत या टिकाऊ जीवन शैली अपनाना कोई मुश्किल काम नहीं है । आजकल तो सरकार द्वारा भी इसके लिए गई कदम उठाए जा रहे हैं । अब वक्त है हमारे सही कदम उठाने का । सस्टेनेबल लाइफस्टाइल अपनाना, कचरा कम करना, बिजली व पानी बचाना कोई मुश्किल काम नहीं है । बस जरूरत है तो हमारी दृढ़ इच्छा शक्ति की । प्रकृति ने हमें इतना कुछ दिया है, अब हमारा दायित्व है कि हम उसका अच्छे से इस्तेमाल करें और हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी इसे बचाएं । हमें बस निजी स्वार्थ को छोड़कर सहयोगात्मक रवैया अपनाने की जरूरत है । यही वह रास्ता है जिस पर चलकर हम पर्यावरण और संसाधनों को बचा सकते हैं । तो आईए आज से ही सतत जीवन शैली को अपनाने की शुरुआत करें ।
क्या आपने भी अपनी रसोई के गीले कचरे से खाद बनाई है ? हमें कमेंट बॉक्स में बताएं ।

बहुत अच्छा लिखा
I use kitchen waste in my organic garden by turning it into organic compost.
These small steps can help nature a lot. You’re spreading awareness through your articles. Keep going on 👍