क्या आपने सोचा है कि हम अपनी जीवनशैली में छोटे – छोटे बदलाव लाकर इस E – Waste को कम कर सकते हैं साथ ही पर्यावरण और हमारी धरती को बचा सकते हैं | LiFE Mission (Lifestyle for Environment ) यही तो हमें सिखाता है | यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं बल्कि एक जन – आन्दोलन है | यह भारत द्वारा दुनिया को दिखाया वह रास्ता है जिस पर चलकर हम भविष्य में हमारी धरती को ई – वेस्ट मुक्त बना सकते हैं और पर्यारण को बचा सकते हैं |
आज हम डिजिटल युग में जी रहे हैं | जहाँ हमारे घर, ऑफिस और आस – पास की लगभग सभी चीजें डिजिटल होती है | हमारे हाथ में मौजूद स्मार्टफोन से लेकर घर के पुराने मिक्सर ग्राइंडर तक सभी इलेक्ट्रॉनिक चीजों का हमारी जिंदगी में अहम् हिस्सा है | लेकिन जब ये गैजेट्स खराब या पुराने हो जाते हैं, तो हम तो नए गैजेट्स ले आते हैं पर कभी सोचा है इन पुराने गैजेट्स का क्या होता है ? ये या तो घर के कबाड़ में पड़े होते हैं या हम इन्हें कबाड़ी को बेच देते हैं | वहां पर भी यह ई – कचरा सालों तक पड़ा रहता है | हर साल करोड़ों टन ई – कचरा हमारी धरती और हमारी सेहत को चुपचाप बीमार कर रहा है |
तो आइये विस्तार से समझते हैं कि ई -वेस्ट मैनेजमेंट क्या है और लाइफ मिशन के सिद्धान्तों को अपनाकर हम अपनी धरती को एक बेहतर भविष्य कैसे दे सकते हैं –

E – Waste क्या है और यह ख़तरनाक क्यों है ?
ई – वेस्ट = ये वे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होते हैं जो या तो ख़राब हो चुके हैं या उनका उपयोग का समय समाप्त हो चुका है या फिर वो इतने पुराने हो चुके हैं कि हम इनका उपयोग कर नहीं सकते या करना नहीं चाहते हैं | उदाहरण – पुराने घरेलु सामान जैसे टी. वी., फ़्रिज, एयर कंडीशनर, मिक्सर ग्राइंडर, इलेक्ट्रॉनिक खिलौने आदि | इनके अलावा बड़ी इलेक्ट्रॉनिक मशीनों के पुर्जे, चिकित्सा उपकरण, प्रयोगशाला उपकरण, नेटवर्किंग व दूरसंचार उपकरण आदि |
इन सभी पुराने और ख़राब उपकरणों में 1000 से ज्यादा ज़हरीले रसायन होते हैं जैसे – सीसा, पारा, कैडमियम, निकेल, बेरिलियम आदि |
- इन सभी उपकरणों को लैंडफिल यानि जमीन में दबाने पर ये रसायन पानी में घुलकर भूगर्भीय जल व मिट्टी दोनों को प्रदूषित करते हैं |
- ये स्वास्थ्य के लिये भी खतरा होते हैं | इन्हें जलाने पर निकली जहरीली गैस हवा में मिलकर हमें बीमार करती है | इससे हमें श्वसन संबंधी बीमारियाँ, तंत्रिका तंत्र में खराबी और कैंसर भी हो सकता है |
- हमारे फ़ोन और लैपटॉप में मौजूद संवेदनशील डेटा गलत हाथों में पड़ सकता है, जिससे हमें कई तरह की परेशानियाँ हो सकती है |
भारत में E – Waste की स्थिति ( 2026 के आंकड़े ) –
हमारे पास स्मार्टफोन है, फिर भी हम उसका 2-3 साल उपयोग करने के बाद नया स्मार्टफोन ले लेते हैं | आख़िर क्यों ? कंपनियां अपने ब्राण्ड्स को अपग्रेड करके नए लॉन्च करती रहती है | हम भी नए गैजेट्स खरीद लेते हैं और पुराने को रख देते हैं | 2026 के आंकड़े बताते है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ई – वेस्ट उत्पादक देश है | COP – 30 की रिपोर्ट कहती है कि शहरी अपशिष्ट से जानलेवा मीथेन गैस निकलती है जो एक गंभीर वैश्विक ख़तरा बनती जा रही है |
गावों में ई – वेस्ट कम होता है लेकिन बायो वेस्ट ज्यादा होता है | उसे भी रीसायकल करने के वहां ना तो पर्याप्त साधन है और ना ही जागरूकता है |
भारत में भी तीव्र शहरीकरण हो रहा है | 2030 तक शहरों से प्रतिवर्ष 16. 5 करोड़ टन अपशिष्ट पैदा होगा जो 2050 तक 43. 5 करोड़ टन हो जायेगा साथ ही यह 41 करोड़ टन से ज्यादा ग्रीन हाउस गैस उत्पन्न करेगा |
हाल की स्थिति देखें तो भारत में प्रतिदिन 1,70,000 टन नगरपालिका ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता है, और 62 मिलियन टन वार्षिक नगरपालिका ठोस उत्पन्न होता है | प्रतिवर्ष 56 लाख टन प्लास्टिक अपशिष्ट भी उत्पन्न होता है |
भारत के ई – वेस्ट उत्पादन में पिछले 5 वर्षों में 73 % की वृद्धि हुई है | भारत में वर्ष 2023 – 2024 में 1.751 मिलियन मीट्रिक टन ई -वेस्ट उत्पन्न हुआ था | CPCB ( केंद्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड ) की रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष 7 .9 मिलियन टन औद्योगिक अपशिष्ट उत्पन्न होता है |
ये आंकड़े हमें बताते हैं कि भारत में वेस्ट मैनेजमेंट ठीक से नहीं किया जा रहा है | धीरे – धीरे ये समस्या गंभीर बनती जा रही है |

मिशन लाइफ ( पर्यावरण के लिये जीवनशैली ) –
मिशन लाइफ भारत के नैतृत्व में एक वैश्विक जन आन्दोलन है | इसे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने COP – 26 ( 2021 ) में सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिये शुरू किया था | इसमें नागरिकों को छोटे -छोटे लक्ष्य बनाकर उन्हें पूरा करने का आह्वान किया गया है | ये छोटे लक्ष्य अगर आदत बन जाये तो हम एक अच्छे भविष्य की कल्पना कर पाएंगे | जैसे – उपयोग ना होने पर लाइट्स बंद करना, कार पूलिंग, इलेक्ट्रॉनिक वाहनों का उपयोग, रिचार्जेबल लीथियम सेल ( दोबारा चार्ज होने वाली बैटरी ) का उपयोग, पेन ड्राइव या हार्ड ड्राइव की जगह क्लाउड स्टोरेज आदि |
उद्देश्य – संसाधनों के अंधाधुंध और विनाशकारी उपभोग को सचेत और उद्देश्यपूर्ण उपयोग से बदलना है | साथ ही व्यक्तियों को पर्यावरण संरक्षण के लिये ग्रह समर्थक लोग बनाने के लिये प्रेरित करना है | चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर 5R को प्रोत्साहन देना है | [ 5R – Reduce ( कम करना ), Reuse ( पुनः उपयोग ), Recycle ( पुनर्चक्रण ), Reproduction ( पुनर्निर्माण ), Redistribution ( पुनर्वितरण ) ]
लक्ष्य – 2028 तक 1 अरब भारतीयों और वैश्विक नागरिकों को पर्यावरण के अनुकूल आदतें अपनाने के लिये प्रेरित करना | जिसमें 80 % गावों / शहरी निकायों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने का लक्ष्य शामिल है |
E – Waste collection के लिये सरकार द्वारा उठाये जा रहे कदम –
मिशन लाइफ के अंतर्गत ई – कचरे के वैज्ञानिक निपटान व संग्रह पर ध्यान दिया जा रहा है | इसके लिये नियम बनाये गये हैं जो उत्पादकों व उपभोक्ताओं दोनों के लिये है | साथ ही जागरूकता के लिये समय – समय पर अभियान चलाये जाते हैं | कुछ प्रयासों को यहाँ समझ सकते हैं –
- विस्तारित निर्माता उत्तरदायित्व ( EPR ) नियम – ये नियम 2022 में लागू किये गये | इसके अंतर्गत उत्पादकों के लिये ई – कचरे के पुनर्चक्रण व निपटान का वार्षिक लक्ष्य निर्धारित किया गया |उत्पादकों को पिछले वर्ष में बेचे गये उत्पादों की मात्रा के आधार पर दिया गया न्यूनतम पुनर्चक्रण दायित्व इस प्रकार है – वर्ष 2023 -2025 के लिये 60 % , 2025 – 2027 के लिये 70 % , 2027 के बाद 80 %
- वैज्ञानिक तरीके से रीसाइक्लिंग व पुनर्चक्रण – वैज्ञानिक तरीके से ई – कचरे से धातुएं निकालने के लिये ई – पारिसारा ( E – Parisara ) जैसे वैज्ञानिक संयंत्र स्थापित किये जा रहे हैं |
- ई – कचरा संग्रहण डिब्बे ( ई -वेस्ट Bins ) – बैंगलुरु में ई – वेस्ट बिन्स स्थापित किये गये हैं | भीलवाड़ा ( राजस्थान ) में ई – वेस्ट को अलग से इकट्ठा करने और औद्योगिक क्षेत्रों में ई – वेस्ट के सही निपटान की गाइडलाइन्स जारी की गयी है | साथ ही आस – पास के ई – कचरे को अलग करने के लिये वैज्ञानिक सेंटर्स स्थापित किये जा रहे हैं |
- जागरूकता अभियान – मिशन लाइफ के अंतर्गत सामुदायिक कार्यशालाओं, सोशल मीडिया व स्कूलों के कार्यक्रमों में इसकी जानकारी दी जाती है |
- ई – कचरा प्रबंधन ( संशोधन ) नियम 2023 व 2024 – नियम में संशोधनों के तहत EPR प्रमाण पत्रों के व्यापार के लिये टिकाऊ प्रबंधन सुनिश्चित किया जा रहा है |
पुराने इलेक्ट्रॉनिक्स को रीसायकल कहाँ व कैसे करें –
पुराने इलेक्ट्रॉनिक्स को रीसायकल करने के लिये कुछ आसान स्टेप्स यहाँ दिए गये हैं | इनकी सहायता से घर के ई – कचरे को सही जगह पर रीसायकल किया जा सकता है –
step – 1 पहचाने = जिन उपकरणों की जरुरत नहीं है उन्हें पहचानकर इकट्ठा करें और देखें कि कौनसे उपकरण मरम्मत के बाद फिर से उपयोग में लिये जा सकते हैं और किन उपकरणों को रीसायकल करने की जरुरत है |
step – 2 डेटा डिलीट करें = रीसायकल करने से पहले अपने फ़ोन और लैपटॉप से सारा डेटा डिलीट करना जरुरी है |
step – 3 ऑथोराइज्ड सेंटर ढूंढे = अपने स्थानीय नगर निगम या सरकारी पोर्टल ( मेरी लाइफ ) पर जाकर नजदीकी ई – वेस्ट कलेक्शन सेंटर का पता लगायें और वहां ई – वेस्ट रीसायकल करें |
step – 4 एक्सचेंज प्रोग्राम = बड़ी कंपनियां जैसे – एप्पल, सैमसंग, cashify आदि के रीसायक्लिंग या एक्सचेंज ऑफर का फ़ायदा उठायें |
E – Waste रीसाइक्लिंग के फ़ायदे –
ई – वेस्ट रीसायकल करने के फ़ायदे पर्यावरण के साथ हमें भी होते हैं | बस कुछ बातों पर ध्यान देकर इसका लाभ प्राप्त किया जा सकता है –
- पर्यावरण की रक्षा – रीसाइक्लिंग से हानिकारक रसायन हवा, पानी और मिट्टी में मिलने से बचते हैं, जिससे पर्यावरण तो सुरक्षित होता ही है साथ ही पारिस्थितिकी तंत्र भी सुरक्षित रहता है |
- संसाधनों का संरक्षण – रीसाइक्लिंग से तांबा, सोना, चांदी व अन्य कीमती धातुएं प्राप्त होती है | जिससे इन्हें खदानों से निकालने की जरुरत कम पड़ती है और ऊर्जा की भी बचत होती है |
- स्वास्थ्य सुरक्षा – ई – वेस्ट से सीसा, पारा, कैडमियम व अन्य हानिकारक तत्वों को रीसायकल करने से कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का ख़तरा कम हो जाता है |
- आर्थिक लाभ व रोजगार – रीसाइक्लिंग से सरकार को राजस्व प्राप्त होता है और रीसाइक्लिंग उद्योगों में रोजगार भी मिलता है |
- लैंडफिल का कम होना – रीसाइक्लिंग से लैंडफिल साइटों पर बोझ कम होगा और भूमि की उपयोगिता बनी रहेगी |

निष्कर्ष : एक छोटी सी शुरुआत और एक बड़ा बदलाव
हमें समझना चाहिए कि तकनीक हमारी सुविधा के लिये है ना कि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने के लिये | ई – वेस्ट की समस्या जितनी बड़ी है उपाय उतना ही सरल है | वह उपाय है हमारी जीवनशैली में बदलाव | मिशन लाइफ हमें सिखाता है ” फेंको और नया खरीदो ” संस्कृति ( Throw Away culture ) की जगह ” रिपेयर और यूज़ ” की आदत डालें | अगर हमनें अपनी जीवनशैली अभी नहीं सुधारी तो आने वाले दिनों में हमारी धरती कचरे का ढेर बन जाएगी | इसलिए अब हमें ई – कचरे का सही निपटान करके धरती को फिर से हरा – भरा बनाना है |
आपको यह जानकारी कैसी लगी ? क्या आपने भी कभी अपने पुराने गैजेट्स को रीसायकल किया है ? कमेन्ट्स में जरुर बताएं |
( डिस्क्लेमर : इस लेख में दी गयी जानकारी व आंकड़े विभिन्न विश्वसनीय श्रोतों और हालिया समाचारों पर आधारित है | समय के साथ इनमें बदलाव हो सकता है | इसलिए आधिकारिक वेबसाइट का सन्दर्भ अवश्य लें |)

बहुत बढ़िया आप प्रकृति को लेकर इतने उत्साहित हो आपकी हर कामयाभी में अभी के लिए बधाइयां
Your articles are getting better and better.
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Best of luck for everything you do.
कचरे के संदर्भ में आपका लेख सराहनीय है प्रकृति साफ रहेंगी तो मानव स्वस्थ रहेगा छोटी सी शुरुआत एक बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है आपका यह कार्य जारी रहे पहला सुख निरोगी काया जब स्वास्थ्य ठीक रहता है तभी निरोग हो सकता है निरोग प्रकृति के द्वारा ही जब प्रकृति साफ रहे सुचारू रूप से अपना कार्य करें इसलिए इस प्रकार के लिखे की आवश्यकता होती है जो पूरी दुनिया को अवगत कारण और इस मार्ग पर चले और प्रकृति के प्रति सब सजग रहे हैं धन्यवाद
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