कल दोपहर बाहर निकलते ही धूप चुभने लगी । घर वापस आने पर मन किया पंखा चालू कर लूं । फिर सोचा अभी तो फरवरी भी खत्म नहीं हुआ और इतनी गर्मी । अगर अभी ऐसा मौसम है तो इस बार गर्मियों में क्या होगा ? क्या AC खरीद लेना चाहिए ? लेकिन यह ना तो हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा है और ना ही पर्यावरण के लिए। फिर अगर बजट की बात करें तो समझो जेब खाली। क्या आप भी सोचते हैं कि AC vs Air cooler में से क्या लेना चाहिए जो बजट में भी हो और हमें व पर्यावरण को भी नुकसान ना पहुंचाएं ।
चाहे AC इस्तेमाल करो या कूलर, बात तो शरीर व मन के प्रकृति के साथ अनुकूलन की है ।
क्या आपने भी अपने बचपन में गांव में वो मिट्टी के घर देखे हैं ? इन घरों की दीवारें मिट्टी से बनी और मोटी होती थी। उनकी छत घास-फूस के छप्पर की बनी होती थी । यह घर गर्मियों में ठंडे और सर्दियों में गर्म रहते थे। आज इस आधुनिक युग में हम सब आगे बढ़ना चाहते हैं । अब वह मिट्टी के घर तो मुमकिन नहीं लेकिन कुछ ऐसे उपाय है जो वही प्राकृतिक ठंडक घर में लायें । एसी और कूलर में भी वही प्राकृतिक और कृत्रिम ठंडक का फर्क है । आईए जानते हैं कौन सा ज्यादा अच्छा है एक मध्यम वर्गीय परिवार के लिए और पर्यावरण के लिए भी-

बिजली की खपत और कार्बन फुटप्रिंट ( जानिए AC vs Air cooler के सन्दर्भ में ) –
एसी या कूलर को खरीदने से पहले कुछ बातें जान लेनी चाहिए। इनके द्वारा की जाने वाली बिजली की खपत, उससे आने वाला बिजली बिल और कार्बन फुटप्रिंट। आमतौर पर एक फाइव स्टार एसी 840 वॉट बिजली प्रति घंटे खर्च करता है । जबकि एक कूलर 400 वॉट बिजली प्रति घंटे खर्च करता है । इस हिसाब से कूलर का महीने का बिल 1000 रुपए तो एसी का बिल ₹2100 हो सकता है। साथ ही एसी का मेंटेनेंस व उसे रिफिल भी करवाना पड़ता है । वह खर्चा अलग है । लेकिन कूलर में यह खर्चा बहुत ही कम है ।
तो देखा आपने कूलर आपके हर महीने हजार रूपए बचा सकता है । साथ ही यह प्राकृतिक ठंडी हवा भी देता है । अगर आप बचत पर ध्यान देते हैं तो कूलर Best option है ।
AC vs Air cooler के पर्यावरण पर असर –
जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसे बड़े खतरों से हम पहले ही अवगत हैं। एसी ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को बढ़ा रहा है । एसी में प्रयोग की जाने वाली गैसें कमरे के तापमान को तो कम करती है लेकिन बाहर के तापमान को बढ़ाती है । लेकिन सोचने वाली बात तो यह है कि एसी की वजह से बाहर का तापमान बढ़ता है और जैसे ही तापमान बढ़ता है, हम एसी खरीदते हैं । दुनियाभर में जितनी ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है उसमें एसी का योगदान 4% है। एसी के कारण CO2 की मात्रा में भी वृद्धि हो रही है । एसी से सीधे तौर पर तो CO2 गैस नहीं निकलती । लेकिन बिजली बनाने हेतु कोयले जैसे जीवाश्म ईधन को जलाने से CO2 गैस निकलती है ।
हाइड्रोफ्लोरो कार्बन ( HFC ) व क्लोरोफ्लोरो कार्बन ( CFC ) इससे निकलने वाली प्रमुख ग्रीनहाउस गैसें हैं । इन गैसों की वजह से ओजोन परत को नुकसान पहुंचता है । जिससें धरती का तापमान बढ़ता है । रिसर्च कहते हैं कि एसी को एक घंटा चलाने पर एक पाउंड ( 500 ग्राम ) कार्बन उत्सर्जन होता है । 2024 में एसी की वजह से 156 मिलियन टन CO2 का उत्सर्जन हुआ जो की भारत में सभी यात्री कारों के उत्सर्जन के बराबर है । पर्यावरण थिंक टैंक इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरमेंट, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी ( आईफॉरेस्ट ) की सर्वेक्षण रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एसी देश में सबसे ज्यादा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन करने वाला उपकरण है ।
आईफॉरेस्ट की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 40% एसी हर साल रिफिल किए जाते हैं, जो वैश्विक मानकों से अधिक है । वैसे तो हर 5 साल में एक बार एसी रिफिल करवाना चाहिए, लेकिन भारत में हर दो-तीन साल में एक बार एसी रिफिल करवाया जाता है ।
क्या आप जानते हैं 2024 में एसी को 32000 टन रेफ्रिजरेंट रिफिल की आवश्यकता पड़ी। प्रति एसी औसतन ₹2200 की रिफिलिंग लागत मानें तो परिवारों ने 7000 करोड़ रुपए ( 0.8 बिलियन डॉलर) खर्च किए ।

सेहत पर असर
कूलर व एसी दोनों के सेहत पर अलग-अलग असर पड़ते हैं । कुछ सकारात्मक तो कुछ असर नकारात्मक होते हैं। यह आपके शरीर की अनुकूलन करने की क्षमता पर निर्भर करता है । कुछ लोग बिना एसी व कूलर के भी भयंकर गर्मियों को सहन करते हैं। यह शरीर के अनुकूलन की शक्ति व मन की चाहत है कि हमें कैसे जीवन जीना है। आईए समझते हैं इनके सेहत पर असर को –
एसी के नकारात्मक असर –
- एसी की शुष्क हवा से शरीर की नमी खत्म हो जाती है । जिससे ड्राई स्किन की समस्या होती है।
- शुष्क हवा से आंखों में जलन व खुजली की समस्या हो सकती है । ऐसे में जो लोग पहले ही ड्राई आइज़ की परेशानी से जूझ रहे हो उन्हें इससे दूर रहना चाहिए ।
- कई लोगों को एसी की ठंडी हवा से सिर दर्द की समस्या हो सकती है ।
- लगातार एसी में रहने से नाक बंद होना, गला सूखना, खांसी व जुकाम भी हो सकता है ।
- लगातार एसी में रहने से जोड़ों में दर्द व शरीर में अकड़न भी हो सकती है ।
- एसी की ठंडी हवा शरीर के इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देती है । जिससे जल्दी बीमार होने का ख़तरा बढ़ जाता है ।
एसी के सकारात्मक असर –
- भयंकर गर्मी में एसी की ठंडी हवा में नींद अच्छी आती है ।
- एसी से धूल कण, पराग कण व फफूंद में कमी होती है, जिससे एलर्जी व अस्थमा के मरीजों को राहत मिलती है ।
- गर्मी से होने वाले तनाव से राहत मिलती है ।
कूलर के सेहत पर असर – कूलर धूल-मिट्टी को नहीं रोक सकता । जिससे किसी को एलर्जी की समस्या हो सकती है । इसके अलावा कूलर के कोई नकारात्मक असर नहीं हैं । यह नमीयुक्त प्राकृतिक ठंडी हवा प्रदान करता है।
तुलना तालिका –
इस तुलना तालिका की मदद से एसी व कूलर के फायदों व नुकसान को ठीक से समझा जा सकता है । जिससे आपको यह निर्णय लेने में सहायता मिलेगी की क्या खरीदना है ।
एसी बनाम एयर कूलर –
| विशेषता | एयर कूलर | एयर कंडीशनर |
| बिजली की खपत | बहुत कम ( 80 -90 ) % बचत | बहुत ज्यादा ( बिजली बिल महंगा ) |
| गैस उत्सर्जन | कोई नहीं ( zero GHG ) | CFC, HFC ओज़ोन परत के लिये हानिकारक ) |
| हवा की क्वालिटी | ताज़ी व प्राकृतिक नमी युक्त हवा | रीसायकल व सूखी हवा |
| कीमत | सस्ता व टिकाऊ | महंगा व हाई मेंटेनेंस |
| पर्यावरण रेटिंग | ⭐⭐⭐⭐⭐ ( बेहतरीन ) | ⭐ ( निराशाजनक ) |
सस्टेनेबल चॉइस : आपको क्या चुनना चाहिए
- एयर क्वालिटी – कूलर से फ्रेश एयर मिलती है जबकि एसी कमरे की हवा को ही बार-बार ठंडा करके भेजता रहता है । अगर किसी को एलर्जी है तो वह दूसरे को भी हो सकती है ।
- स्थान – अगर आप मुंबई या समुद्री एरिया में रहते हैं तो एसी वहां की आर्द्रता वाली गर्मी में राहत दिलाता है । लेकिन अगर आप शुष्क इलाके में रहते हों तो कूलर ही सबसे सही है ।
- प्राइस – एसी की शुरुआती प्राइस 30000 से 35000 रुपए होती है । जबकि कूलर तो 10000 रुपए से भी कम में आसानी से खरीदा जा सकता है ।
- पोर्टेबिलिटी – कूलर को अपनी सुविधा के अनुसार कहीं भी रख सकते हैं लेकिन एसी को एक ही स्थान पर इंस्टॉल करवाना पड़ता है ।
- मेंटेनेंस – एसी को समय समय पर मेंटेनेंस की आवश्यकता होती है । जैसे फिल्टर को साफ करवाना, गैस रिफिल करवाना आदि । जबकि कूलर को सिर्फ साफ सफाई की आवश्यकता होती है । इसका मेंटेनेंस बहुत आसान व सस्ता होता है।
- बचत – इसके बारे में हम पहले ही बात कर चुके हैं कि एसी बहुत महंगा लेकिन कूलर बहुत सस्ता पड़ता है ।
अगर आपके घर में एसी तो कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है –
- स्लो मोड पर फैन चलाएं । इससे घर जल्दी ठंडा हो जाता है ।
- ड्राइनेस से बचने के लिए ह्यूमिडिफायर या पानी का बर्तन कमरे में रखें ।
- समय – समय पर खिड़की खोलकर ताजी हवा को भी कमरे में आने दें ।
- एसी की रेगुलर सर्विसिंग करवाएं।
- हाइड्रेटेड रहें। दिन भर पानी पीते रहना जरूरी है।
- बाहर गर्मी से आते ही तुरंत एसी में नहीं बैठना चाहिए ।
निष्कर्ष – जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान दिन – प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है । ऐसे में हमें अपनी जरूरतों के साथ – साथ पर्यावरण के बारे में भी सोचना चाहिए । टेक्नोलॉजी हमें सुविधा तो प्रदान करती है,परंतु यह पर्यावरण को भी उतना ही नुकसान पहुंचाती है । हो सकता है एक टाइम ऐसा भी आए जब गर्मी इतनी हो कि एसी भी काम करना बंद कर दे । सोचो कितनी भयावह होगी वह स्थित । प्राकृतिक तरीकों का जितना ज्यादा इस्तेमाल करेंगे आगे जाकर सुरक्षित भी वही रहेगा । बढ़ते तापमान को रोकने के लिए पेड़ लगाना बहुत जरूरी है । जितना हम हमारी धरती को हरा-भरा व साफ-सुथरा रखेंगे तापमान भी उतना ही कम होगा। तो सोच – समझ कर कदम उठाएं और अपने पर्यावरण को बचाऐं ।
क्या आपने भी कोई पेड़ लगाया है ? हमें कमेंट्स में जरूर बताएं ।
( डिस्क्लेमर : इस लेख में दिए गये आंकड़े विश्वसनीय स्रोतों से लिये गये हैं | समय के साथ इनमे परिवर्तन संभव है | अतः सटीक जानकारी हेतु आधिकारिक रिपोर्ट्स और वेबसाइट का सन्दर्भ लें |)

Nice article. Easy and simple language. Nicely explained.
Well done 👍
बहुत बढ़िया ऐसी फ्रिज पंखे के बारे में बताने के लिए बिल बहुत अधिक आता था
It is Helpful Knowledge as Economical and Environmental in this Era.